
“कंचना बिहारी मार्ग पर मंडरा रहा करंट का खतरा, 25 डिग्री झुका ,हाईटेंशन खंभा बना ‘मौत का टावर’”
“हर पल जान जोखिम में: 11,000 वोल्ट का झुका खंभा चीख-चीख कर मांग रहा कार्रवाई”
“बिजली विभाग की लापरवाही से दहशत में लोग, हादसे को खुला न्योता दे रहा झुका हाईटेंशन पोल”
दैनिक इंडिया न्यूज़ ,लखनऊ। राजधानी में बिजली विभाग की घोर लापरवाही अब आम नागरिकों की जान पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। कल्याणपुर स्थित कंचना बिहारी मार्ग पर 11,000 वोल्ट की हाई-टेंशन लाइन का एक विशाल बिजली खंभा पिछले कई दिनों से खतरनाक रूप से झुका हुआ है, लेकिन विभागीय तंत्र मानो किसी बड़े हादसे की प्रतीक्षा कर रहा हो। ट्रांसफार्मर के ठीक सामने स्थित यह खंभा करीब 25 डिग्री तक तिरछा हो चुका है और स्थानीय लोगों के अनुसार इसकी स्थिति लगातार और अधिक गंभीर होती जा रही है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह मार्ग अत्यंत व्यस्त रहता है, जहाँ दिनभर राहगीरों, स्कूली बच्चों, वाहनों और दुकानदारों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में यदि यह हाई-टेंशन खंभा अचानक गिरता है, तो न केवल भीषण जनहानि हो सकती है बल्कि आसपास स्थित ट्रांसफार्मर के कारण आग लगने, शॉर्ट सर्किट और करंट फैलने जैसी भयावह स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। स्थानीय नागरिकों के मन में हर पल भय और आशंका का माहौल बना हुआ है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि क्षेत्रीय लोगों द्वारा कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को इस खतरे से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन जिम्मेदारों का रवैया बेहद उदासीन बना हुआ है। नागरिकों का आरोप है कि शिकायत करने पर विभागीय कर्मचारी केवल इतना कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच निकलते हैं कि “यह खंभा नहीं गिरेगा।” विभाग की यही लापरवाही अब लोगों के आक्रोश का कारण बनती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते यदि इस खंभे को ठीक नहीं कराया गया, तो आने वाला समय किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
जनता ने बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों और प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और इस खतरनाक खंभे को सुरक्षित कराया जाए, ताकि किसी निर्दोष की जान खतरे में न पड़े।
कंचना बिहारी मार्ग पर झुका यह बिजली खंभा अब केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि विभागीय लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता का जीवंत प्रतीक बन चुका है।