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ऋषि-परंपरा का अखंड प्रवाह : महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि के प्रवचनों में राष्ट्रधर्म का दिव्य आलोक*

*हजारों रामभक्तों की तन्मय उपस्थिति में गूँजी आध्यात्मिक चेतना, संतवाणी ने जगाया राष्ट्रधर्म का प्रखर भाव*

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Dainik India News

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ऋषि-परंपरा का अखंड प्रवाह : महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि के प्रवचनों में राष्ट्रधर्म का दिव्य आलोक*








दैनिक इंडिया न्यूज़,नई दिल्ली।

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की अक्षुण्ण धारा में संतों और ऋषियों का अविरल प्रवाह सदैव राष्ट्रजीवन को आलोकित करता रहा है। इसी कड़ी में महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि के ओजस्वी प्रवचनों एवं रामकथा के माध्यम से जागृत हो रही राष्ट्रचेतना को लेकर जितेंद्र प्रताप सिंह ने मीडिया को संबोधित करते हुए अत्यंत गूढ़ एवं प्रेरणास्पद उद्गार व्यक्त किए।









उन्होंने कहा कि भारत की पावन भूमि कभी भी ऋषियों और मनीषियों से रिक्त नहीं रही है; प्रत्येक युग में संतों ने अपने तप, त्याग और तत्वज्ञान से समाज को दिशा प्रदान की है। महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि इसी दिव्य परंपरा के सशक्त संवाहक हैं, जिनके श्रीमुख से प्रवाहित रामकथा केवल धार्मिक आख्यान नहीं, अपितु राष्ट्रधर्म, कर्तव्यबोध और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का घोष है।

जितेंद्र प्रताप सिंह ने विशेष रूप से कैलाशानंद गिरि के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि उनकी कथा-शैली में भक्ति का माधुर्य, वेदांत का गाम्भीर्य और राष्ट्रप्रेम का प्रखर तेज एक साथ परिलक्षित होता है। उनके प्रवचनों में भगवान श्रीराम के चरित्र को केवल मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में ही नहीं, बल्कि आदर्श राष्ट्रनायक, धर्मसंस्थापक और लोककल्याण के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जो वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में अत्यंत प्रासंगिक है।




उन्होंने आगे कहा कि आज का समाज भौतिकतावाद, नैतिक शिथिलता और सांस्कृतिक विस्मृति के द्वंद्व से गुजर रहा है। ऐसे समय में कैलाशानंद गिरि की रामकथा जनमानस में आत्मचिंतन, संयम और कर्तव्यनिष्ठा का संचार कर रही है। राम केवल एक आराध्य नहीं, बल्कि जीवन-पद्धति हैं—सत्य, मर्यादा, करुणा और राष्ट्रनिष्ठा के जीवंत प्रतिमान।




राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह भी प्रतिपादित किया कि कैलाशानंद गिरि के प्रवचन समाज के विविध वर्गों को एकसूत्र में पिरोने का कार्य कर रहे हैं। उनके माध्यम से राम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का जो अभियान चल रहा है, वह न केवल आध्यात्मिक उत्थान का माध्यम है, बल्कि राष्ट्रीय एकात्मता और सांस्कृतिक स्वाभिमान को सुदृढ़ करने का सशक्त प्रयास भी है।

अंत में जितेंद्र प्रताप सिंह द्वारा प्रदत्त संदेश में उल्लेख किया गया कि दीनदयाल कामधेनु गौशाला समिति, गऊ ग्राम परखम (मथुरा) द्वारा आयोजित श्रीराम कथा में केंद्रीय मंत्री एस पी एस बघेल मुख्य श्रोता के रूप में तथा वे स्वयं विशिष्ट श्रोता के रूप में उपस्थित रहे। इस दिव्य आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारीगण एवं जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में निरंजन पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 आचार्य महामण्डलेश्वर डॉ. स्वामी कैलाशानंद गिरि के मुखारविंद से हजारों रामभक्तों ने एकाग्रता एवं तन्मयता के साथ कथा-श्रवण किया।




उन्होंने आगे कहा कि पूर्व मंत्री सतीश अवाना, नारायण दास अग्रवाल, सुरेश कौशिक, किशन चौधरी तथा प्रमोद कसेरे सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों के समन्वित प्रयासों से यह आयोजन भव्य, दिव्य एवं अलौकिक स्वरूप में परिणत हुआ, जिसने समाज में आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रनिष्ठा के भाव को और अधिक प्रगाढ़ करने का कार्य किया।

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