
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वच्छता, शौचालय और जनजागरूकता को बीमारी पर नियंत्रण का आधार बताया; डिजिटल सेवाओं और कौशल प्रशिक्षण को ग्रामीण रोजगार व सशक्तीकरण से जोड़ा

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में जापानी इन्सेफेलाइटिस पर नियंत्रण के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि घर-घर शौचालय निर्माण, स्वच्छता अभियान और जनजागरूकता के व्यापक प्रयासों से बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिली। उनके अनुसार, इन प्रयासों के बाद इन्सेफेलाइटिस से होने वाली मौतों में बड़ी कमी आई है और इसके उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में इन्सेफेलाइटिस लंबे समय तक गंभीर चुनौती रही। गोरखपुर से अपने संसदीय कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने संसद सहित विभिन्न मंचों पर इस बीमारी के खिलाफ आवाज उठाई और समाधान के लिए प्रयास किए। योगी के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन के व्यापक क्रियान्वयन के साथ शौचालय निर्माण, स्वच्छता और जनजागरूकता को अभियान से जोड़ने से बीमारी के नियंत्रण के प्रयासों को मजबूती मिली।

उन्होंने विकास के अगले चरण को तकनीक और ग्रामीण सशक्तीकरण से जोड़ते हुए कहा कि तकनीक बिना भेदभाव के अवसरों तक पहुंच का माध्यम बन सकती है। जनधन खातों और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुंचने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण और वंचित वर्गों को योजनाओं से जोड़ने में मदद मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का लाभ केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है। स्वर्ण भारत ट्रस्ट द्वारा टेली-एजुकेशन और टेली-मेडिसिन जैसी सुविधाओं के साथ युवाओं को ड्रोन तकनीक, ऑटोकैड और जीआईएस का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उनके अनुसार, इससे गांवों के युवाओं को नए कौशल हासिल करने, आधुनिक रोजगार के लिए तैयार होने और गांव से ही व्यापक बाजारों से जुड़ने के अवसर मिल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि विकास की वास्तविक कसौटी आम नागरिक के जीवन में दिखाई देने वाला बदलाव है। पेयजल, स्वच्छ रसोई, स्वास्थ्य सुरक्षा, पक्का आवास और डिजिटल माध्यमों से युवाओं के लिए खुलते अवसरों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतियों की सार्थकता तभी है, जब वे लोगों के जीवन में नई संभावनाएं पैदा करें।

योगी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में गांवों की भूमिका को केंद्रीय बताते हुए कहा कि सरकार नीतियों के जरिए अवसर उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उनके प्रभावी विस्तार के लिए समाज और सेवा संस्थाओं की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने स्वर्ण भारत ट्रस्ट के ग्रामीण सशक्तीकरण के कार्यों का उल्लेख करते हुए सरकार, समाज और सेवा संस्थाओं की संयुक्त भूमिका को विकसित भारत के निर्माण से जोड़ा।