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"भारत के आत्मा की रक्षा संत करते हैं, सीमा की रक्षा हम-रक्षा मंत्री

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Dainik India News

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"भारत के आत्मा की रक्षा संत  करते हैं, सीमा की रक्षा हम-रक्षा मंत्री

पूज्य सुधांशु जी महाराज के नेतृत्व में 10 गुरुकुल व 108 संस्कार केंद्रों की स्थापना का संकल्प

दैनिक इंडिया न्यूज़,नई दिल्ली। भारत मंडपम का विशाल सभागार रविवार को एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब विश्व जागृति मिशन द्वारा आयोजित ‘सनातन संस्कृति जागरण महोत्सव’ में देश-विदेश से आए संतों, आध्यात्मिक आचार्यों, समाजसेवियों और देशभक्त नागरिकों ने एक स्वर में ‘भारत पुनर्जागरण’ का संकल्प लिया। यह आयोजन पूज्य सुधांशु जी महाराज के 70वें जन्मदिवस और उनके प्रवचन सेवा के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर पूज्य महाराजश्री को राष्ट्र के आध्यात्मिक पुनर्निर्माण के लिए अग्रणी बताते हुए कहा, “सैनिक जहां सीमा की रक्षा करता है, वहीं संत समाज की आत्मा की रक्षा करता है। भारत की महानता केवल उसकी सैन्य शक्ति में नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक और नैतिक चेतना में है।”

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा ‘गुरुकुल मॉडल’ का लोकार्पण, जिसके माध्यम से विश्व जागृति मिशन आने वाले वर्षों में देशभर में 10 गुरुकुल और 108 संस्कार केंद्र स्थापित करेगा। यह मॉडल आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ वैदिक संस्कारों, योग, ध्यान, राष्ट्रप्रेम और चरित्र निर्माण पर आधारित होगा।

पूज्य सुधांशु जी महाराज ने अपने प्रेरणाप्रद उद्बोधन में कहा, “हमारा भारत एक विचार है – यह विचार है शांति, प्रेम, ज्ञान और सेवा का। हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा, अपने बच्चों को ऐसी शिक्षा देनी होगी जो उन्हें केवल ज्ञानी नहीं, बल्कि सज्जन और संस्कारी बनाए। गुरुकुल इस दिशा में क्रांति का काम करेंगे।”

महाराजश्री ने देश के प्रत्येक नागरिक से अपील की कि वे संस्कार क्रांति में भागीदार बनें। उन्होंने 'संस्कारमय भारत' का सपना साझा करते हुए कहा कि “भाषा, भूषा, भाव, भोजन और भजन – ये पाँच आधार भारतीयता के हैं। जो इन्हें बचा लेता है, वही भारत को बचाता है।”

योग ऋषि स्वामी रामदेव ने महाराजश्री की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि “यह महापुरुष आधुनिक युग में प्राचीन मूल्यों की ज्योति जलाने वाले राष्ट्रऋषि हैं। हमें अपने जीवन का 2% अंश – चाहे वह धन हो या समय – इस संस्कार यज्ञ को समर्पित करना चाहिए।”

कार्यक्रम में गोविंद देव गिरि जी महाराज, स्वामी विद्यानंद मुनि, विजय कौशल जी महाराज, स्वामी पूर्णचैतन्य, स्वामी श्री गोविंदानंद तीर्थ, सहित देश के कई प्रमुख संतों ने हिस्सा लिया और भारत को पुनः “विश्वगुरु” बनाने के अभियान को समर्थन दिया।

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, तथा दिल्ली सरकार के अन्य प्रतिनिधियों ने महाराजश्री को सम्मानित किया और कहा कि “उनके विचार समाज को नई दिशा दे रहे हैं।”

कार्यक्रम में नागपुर के श्री दिलीप मुरारका एवं उनकी धर्मपत्नी द्वारा गुरुकुल निर्माण हेतु भूमि समर्पण की घोषणा ने जनसमूह को गहरे रूप से प्रभावित किया। हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने सामूहिक संकल्प लिया कि वे अपने क्षेत्र में संस्कार केंद्रों की स्थापना हेतु यथासंभव सहयोग करेंगे।

इस अवसर पर ‘विश्व जागृति मिशन’ के प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्ष 2030 तक पूरे भारत में संस्कार केंद्रों की एक अखिल भारतीय शृंखला खड़ी की जाएगी।

यह आयोजन केवल एक आध्यात्मिक उत्सव नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की शुरुआत के रूप में उभरा। इसकी गूंज देश की सीमाओं से निकलकर संपूर्ण विश्व में भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान का उद्घोष कर रही है।

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