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गायत्रीपुरम में रामकथा का दिव्य आयोजन: श्रद्धालुओं ने कथा रूपी अमृत का रसपान किया

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Dainik India News

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गायत्रीपुरम में रामकथा का दिव्य आयोजन: श्रद्धालुओं ने कथा रूपी अमृत का रसपान किया

दैनिक इंडिया न्यूज़ ,लखनऊ ।गायत्रीपुरम में जन सेवा कल्याण समिति के तत्वाधान में भव्य रामकथा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का संयोजन आचार्य सत्येंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में किया गया, जहां कथा व्यास श्री राम जी शास्त्री ने अपने श्रीमुख से भगवान राम के जीवन और उनके आदर्शों का वर्णन किया। श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कथा रूपी अमृत का रसपान कर भावविभोर हो गए।

कथा का आरंभ भगवान श्री राम के जन्म प्रसंग से हुआ। कथा व्यास श्री राम जी शास्त्री ने बताया कि भगवान राम का जन्म संपूर्ण सृष्टि के कल्याण के लिए हुआ। उन्होंने चौपाई के माध्यम से इस दिव्य घटना का वर्णन किया:

"भए प्रकट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी मुनि मन हारी, अद्भुत रूप बिचारी।
"

व्यास जी ने बताया कि भगवान राम का अवतार धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए हुआ। उनके जन्म के समय अयोध्या नगरी में अद्वितीय आनंद और दिव्यता का वातावरण व्याप्त था।

इसके बाद कथा में ऋषि विश्वामित्र के साथ भगवान राम की यात्रा और ताड़का वध का वर्णन किया गया। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा व्यास ने समझाया कि भगवान राम ने सदैव धर्म, मानवता और न्याय की रक्षा के लिए कार्य किया।

कथा के चरम पर शिवधनुष तोड़ने का प्रसंग सुनाया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भक्ति और उत्साह से भर दिया। इस अवसर पर चौपाई का उल्लेख हुआ:

"छुअतहिं चढ़ी भुजबल जहँ ते, टूटेउ धनुष बिनु भंजन गेते।
देखि राम बलु लोक पतंग, भय बिस्मित सब बिप्र भुजंग।"

शिवधनुष तोड़ने की कथा में व्यास जी ने बताया कि यह केवल भगवान राम की शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनकी मर्यादा और दिव्यता का प्रमाण भी था। इस प्रसंग में सीता स्वयंवर का उल्लेख हुआ, जिसमें श्री राम और माता सीता के दिव्य मिलन को प्रेम, धर्म और कर्तव्य का आदर्श बताया गया।

कार्यक्रम संयोजक आचार्य सत्येंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि रामकथा केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन को मर्यादा और आदर्शों के मार्ग पर चलने का मार्गदर्शन है। उन्होंने कहा कि भगवान राम का जीवन त्याग, प्रेम और कर्तव्य का आदर्श प्रस्तुत करता है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

इस आयोजन में श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग और भक्ति के साथ भाग लिया। कथा के समापन पर प्रसाद वितरण किया गया और सभी ने धर्म, सत्य और करुणा का संदेश फैलाने का संकल्प लिया। आयोजन का समापन भगवान राम की आरती और जयघोष के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया।

गायत्रीपुरम में इस दिव्य रामकथा में अति विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और अधिक बढ़ा दिया। पार्षद शिवम उपाध्याय (शंकर पूर्वा वार्ड द्वितीय), वरिष्ठ भाजपा नेता दीपक तिवारी, महेंद्र प्रताप सिंह उर्फ पप्पू, गायत्रीपुरम जन सेवा कल्याण समिति के अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार शास्त्री, उपाध्यक्ष चंद्रा श्रीवास्तव, अजीत प्रताप सिंह, आर्यन द्विवेदी, उमेश मिश्रा और एसएन सिंह सहित कई वरिष्ठ मानस प्रेमी इस अवसर पर उपस्थित रहे। अतिथियों ने भगवान राम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के इस आयोजन की सराहना की और श्रद्धालुओं के साथ कथा का रसपान किया। उनकी उपस्थिति और सहयोग ने आयोजन को अत्यंत सफल और भावपूर्ण बना दिया।

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